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वात निवारण वटी

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🌬 वात दोष कैसे होता है? 

वात दोष शरीर के तीन प्रमुख दोषों में से एक है। यह वायु और आकाश महाभूत से बना होता है और शरीर की सभी गतिविधियों, ज्ञानेंद्रियों के कार्य, तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मस्तिष्क की क्रियाओं को नियंत्रित करता है।

जब वात दोष संतुलित होता है, तो व्यक्ति उत्साही, लचीला और रचनात्मक रहता है। लेकिन अगर यह असंतुलित हो जाए तो कई शारीरिक और मानसिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
आइए जानें — वात दोष क्यों बढ़ता है, इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे संतुलित करें।


🌀 वात दोष बढ़ने के कारण

1. आहार संबंधी कारण

  • रूखा, ठंडा, हल्का और विरोधी आहार लेना

  • अधिक तीखा, कड़वा और कसैला भोजन

  • उपवास या अनियमित भोजन

  • पचने में भारी पदार्थ जैसे मैदा, बिस्किट, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, तले हुए पदार्थ

  • अधिक कफवर्धक पदार्थ जैसे – आलू, वड़ा, भजिया, कुरकुरे

  • आइसक्रीम, ठंडा दूध, ठंडी चीजें और कोल्ड ड्रिंक्स

2. जीवनशैली संबंधी कारण

  • अनियमित नींद या नींद की कमी

  • लगातार यात्रा करना (विशेषकर गाड़ी या विमान से)

  • शरीर पर अधिक ठंड लगना

  • अत्यधिक परिश्रम या मानसिक तनाव

  • रातभर जागना

  • चिंता, डर, अधिक सोचना

  • अनियमित या अत्यधिक कठोर व्यायाम

3. पर्यावरणीय कारण

  • ऋतु परिवर्तन – खासकर वर्षा और सर्दियों में

  • ठंडी और सूखी जलवायु

  • धूल, धुआं, प्रदूषण

  • रासायनिक पदार्थों का अधिक संपर्क


⚠️ वात दोष बढ़ने के लक्षण

1. शारीरिक लक्षण

  • जोड़ों और कमर में दर्द, पीठ में अकड़न

  • कब्ज, गैस, पेट फूलना, अपच

  • थकान और कमजोरी, ऊर्जा की कमी

  • त्वचा का रूखापन, खुजली या झुनझुनी

  • नींद की समस्या – नींद नहीं आना या बार-बार उठना

  • शरीर में ठंड लगना, खासकर हाथ-पैर

  • हड्डियों का कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस)

  • सिरदर्द, चक्कर आना

2. मानसिक लक्षण

  • चिंता और तनाव – मन बेचैन और अस्थिर हो जाता है

  • एकाग्रता में कमी – पढ़ाई या काम में ध्यान नहीं लगता

  • डिप्रेशन/उदासी

  • अधिक सोचने की आदत


वात दोष कम करने के उपाय

1. उचित आहार (Vata-Pacifying Diet)

वात को शांत करने के लिए गर्म, चिकना और पौष्टिक भोजन लेना चाहिए।

क्या खाएं:

  • गेहूं, ज्वार, बाजरा से बने ताजे गर्म भोजन

  • दूध, घी, मक्खन, बादाम, खजूर, अंजीर, किशमिश

  • हल्दी, सौंठ, अजवाइन, जीरा, दालचीनी, मेथी

  • खिचड़ी, सूप, उबली हुई सब्ज़ियाँ

  • ताजे, गरम, घर पर बने हुए आहार

क्या न खाएं:

  • फास्ट फूड, पिज़्ज़ा, बर्गर, मैदा, बिस्किट

  • ठंडा भोजन, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स

  • अत्यधिक तीखा और मसालेदार भोजन


2. दिनचर्या सुधारें (Daily Routine)

  • सुबह जल्दी उठें और रात को जल्दी सोएं

  • नियमित हल्का व्यायाम करें (अत्यधिक न करें)

  • तिल या नारियल तेल से आयुर्वेदिक मालिश करें

  • ठंडी हवा और ठंडे पानी से बचें

  • गर्म पानी पीते रहें

  • रोज़ाना ध्यान/मेडिटेशन करें


3. योग और प्राणायाम

योगासन:

  • वज्रासन – पाचन सुधारता है

  • सुप्त बद्धकोणासन – मांसपेशियों की अकड़न में लाभकारी

  • पश्चिमोत्तानासन – शरीर और मन को शांति देता है

  • बालासन – नींद व मानसिक शांति

  • ताड़ासन – संतुलन और स्थिरता देता है

प्राणायाम:

  • अनुलोम-विलोम – वात संतुलन के लिए श्रेष्ठ

  • भ्रामरी – मन को शांत करता है

  • नाड़ी शोधन – वात दोष को शुद्ध करता है


4. आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Remedies)

  • त्रिफला चूर्ण – पाचन व वात संतुलन

  • अश्वगंधा – तनाव और थकावट में लाभदायक

  • दशमूलारिष्ट – वात दोष शांत करनेवाला

  • गंधर्व हरितकी चूर्ण – कब्ज के लिए

  • अजवाइन का काढ़ा – गैस व अपच में फायदेमंद

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